3 moral stories in hindi short





Below are 3 very interesting moral stories in hindi                      
       1.छोटी चुहिया

    (moral stories in hindi )                     


एक छोटी चुहिया थी। वह भूकी थी। उसने दो दिनों से कुछ खाया नहीं था। वह भोजन की तालाश में इधर-उधर भटक रही थी। खाने को कुछ नहीं मिला था जिससे वह दुबली हो गई थी।  उसकी हड्डियां तक दिखाई देने लगी थी।

एक दिन चुहिया को एक टोकरी दिखाई पड़ी। टोकरी में मक्के रखे थे। टोकरी का ढक्कन बंद था। चुहिया अंदर घुसे तो कैसे!

चुहिया की नजर टोकरी के छिद्र पर पड़ी। चुहिया खुश हो गई। छिद्र के रास्ते चुहिया टोकरी के अंदर घुस गई और लगी मक्के के दाने को खाने। कई दिनों से भूखी होने के कारण वह दाने खाते गई। उसने इतने दाने खा लिए कि वह फूलकर कुप्पा हो गई। उसका पेट गुब्बारे जैसा फूल गया था।

चुहिया जब छिद्र से बाहर निकलने लगी तो निकल ही नहीं पाई। उसने कई बार प्रयास किया पर टोकरी से निकाल नहीं सकी। तब वह रोने लगी।

चुहिया के रोने की आवाज नम्रता ने सुनी। वह एक चोटी बच्ची थी। उससे चुहिया का दर्द देखा ना गया। उसने टोकरी  का ढक्कन खोल दिया। चुहिया तेजी से निकली और भागकर ड्रम के पीछे छिप गई।



2. जहां चाह वहां राह

 (moral stories in hindi)                  



एक राजा था। वह एक दिन मंत्री से नाराज़ हो गया। वह मंत्री राजा का चहेता था। लेकिन उस दिन राजा इतना क्रोध हो गया था कि उसे केद करने का हुक्म दे डाला। राजा ने आदेश दिया कि उसे मीनार के उपर केद किया जाए। वह मीनार बहुत ऊंची थी। उसके ऊपर केद होना मिर्त्यु - दंड के समान था और न ही उस गगनचुंबी मीनार से कूदकर कोई भाग सकता था।

जिस दिन मंत्री को पकड़कर मीनार की ओर ले जाया जा रहा था उस समय लोगों ने देखा वह जरा भी जिंतित नहीं था। मंत्री सदा ही प्रसन्नचित्त रहता था और वह आज भी प्रसन्न था।

मंत्री की पत्नी का रो - रोकर बुरा हाल हो रहा था। उससे विदा लेते समय मंत्री ने कहा, "अगर रेशम का एक बहुत पतला धागा भी मेरे पास पहुंचा दो तो मै स्वतंत्र हो जाऊंगा।" इतना कहकर वह सिपाहियो के साथ मीनार की ओर चल पड़ा।

मंत्री की पत्नी ने बहुत सोचा लेकिन इतनी ऊंची मीनार पर रेशम का पतला धागा पहुंचाने का कोई उपाय उसकी समझ में नहीं आया। तब उसने एक फकीर से पूछा। फकीर ने कहा, "भृंग नाम के कीड़े को पकड़ो। उसके पैर में रेशम का धागा बांध दो ओर उसकी मूंछो की बालो में शहद की बूंदे डाल दो। फिर उसका मुंह चोटी की ओर करके उसे मीनार पर छोड़ दो।"

मंत्री की पत्नी ने वैसा ही किया जैसा फकीर ने बताया था। वह कीड़ा शहद की गंध पाकर, उसे पाने के लोभ में, धीरे - धीरे उपर चढ़ने लगा। इस प्रकार रेशम के धागे का एक छोर कैद में रखे गए मंत्री के हाथ तक पहुंच गया। फिर रेशम के धागे से सूत की डोरी  बांधकर उपर पहुंचाई गई ओर उसके बाद डोरी के सहारे मोटा रस्सा। उस मोटे रस्से के सहारे मंत्री नीचे उतर आया। इस प्रकार, वह कैद से बाहर हो गया।

कैद से बाहर आते ही, मंत्री राजदरबार में पहुंचा। राजा ने मंत्री को देखा तो उसे एक पल को विश्वास ही नहीं हुआ। मंत्री ने राजा को सारी घटना बताई। राजा को लगा कि क्षण भर के क्रोध में वह इतने बुद्धिमान मंत्री से हाथ धो देता। उसने सिंहासन  से उठकर मंत्री को गले से लगा लिया। राजा ने आदर के साथ उसे अपने आसन पर बिठाया।


      3. पानी का पैसा      

 (moral stories in hindi )                     



किसी गांव में दूध का एक व्यापारी रहता था। नाम था उसका, छन्नू मल। छन्नूमल की नियत साफ नहीं थी। वह गांव वालों से कम कीमत पर दूध खरीद लेता और उसमें पानी मिला देता। पानी मिला हुआ दूध व आस-पास के गांवों में ऊंची कीमत पर बेच आता था। इस प्रकार, बेमानी सेवर ढेरों कमाई करता।

कुछ ही दिनों में छन्नूमल अमीर हो गया। अब उसके मन में विचार आया कि शहर में दुकान खोली जाए। छन्नूमल ने एक थैले में ढेर सारे सिक्के डाले और चल पड़ा शहर की ओर।

शहर छन्नूमल के गांव से दूर था। वह पैदल चलते-चलते थक गया था। उसे प्यास भी लगी थी। रास्ते में उसे एक नदी दिखाई पड़ी। छन्नूमल नदी के किनारे एक पेड़ के नीचे रुका। सिक्कों से भरा थैला पेड़ के नीचे रखकर वह पानी पीने के लिए नदी के किनारे आया। 

छन्नूमल में जिस पेड़ के नीचे फैला रखा था, उस पेड़ पर बंदर रहते थे। उनमें से एक बंदर वह थैला उठा ले गया और ऊपर पेड़ पर जा बैठा। उसने थैला फाड़ डाला। ठेले में खाने-पीने का सामान तो था नहीं इसलिए उसे क्रोध आ गया। वह सिक्के निकाल-निकाल कर नदी में फेंकने लगा। जब थैले में कुछ ही सिक्के बचे रह गये तब बंदर ने फटा थैला पेड़ के नीचे फेंक दिया।

छन्नूमल पानी पीकर जब पीछे मुड़ा तो बंदर की हरकत देख कर परेशान हो गया। बेचारा क्या करता है, वह सिर पीट कर रह गया।

फटा थैला लेकर छन्नूमल गांव लौट आया। उसने गांववालों को सारी घटना के बारे में बतलाया। एक गांववाले के मुंह से निकला, " चलो, पानी का पैसा पानी में बह गया।"

बेचारा छन्नूमल बहुत शर्मिंदा हुआ। उसने गांववालों के सामने ही ईमानदार बनने की कसम खाई।


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