Premchand ki khani

                                       मैकू

कादिर और मैकू ताड़ीखाने के सामने पहुंचे तो वहां कांग्रेस के वॉलिंटियर झंडा लिए खड़े नजर आए। दरवाजे के इधर-उधर हजारों दर्शक खड़े थे। शाम का वक्त था इस वक्त गली के पियक्कड़ों के सिवा और कोई न आता था। भले आदमी इधर से निकलते झिझकते। पियक्कड़ो कि छोटी-छोटी टोलियां आती-जाती रहती थी। दो- चार वेश्याएं दुकान के सामने खड़ी नजर आती थी। आज यह भीड़-भाड़ देखकर मेकू ने कहा - बड़ी भीड़ है बे, कोई दो-तीन सौ आदमी होंगे।

कादिर ने मुस्कराकर कहां - भीड़ देखकर डर गए क्या? यह सब हुर्र हो जाएंगे, एक को भी ना टिकेगा। यह लोग तमाशा देखने आए हैं, लाठियां खाने नहीं आए हैं।

मेकू ने संदेश के स्वर में कहा - मगर पुलिस के सिपाही भी तो बैठे हैं। ठीकेदार ने तो कहा था, पुलिस न बोलेगी।

कादिर - हां बे, पुलिस न बोलेगी, तेरी नानी क्यों मरी जा रही है। पुलिस वहां बोलती है, जहां चार पैसे मिलते हैं, या जहां कोई औरत का मामला होता है। ऐसी बेफजूल बातो में पुलिस न पड़ती। पुलिस इस वक्त उसकी मदद न करेगी?

मैकू - चलो, आज दस हमारे भी सीधे हुए। मुफ्त में पियंगे वह अलग, मगर सुनते है, कांग्रेसवालों में बड़े-बड़े मालदार लोग शरीक है। यह कही हम लोगो से कसर निकले तो बुरा होगा।

कादिर - अबे, कोई कसर-वसर नहीं निकलेगा, तेरी जान क्यों निकल रही है? कांग्रेस वाले किसी पर हाथ नहीं उठाते, चाहे उन्हें कोई मार ही डाले। नहीं तो उस दिन जुलूस में दस - बारह  चौकीदारों की मजाल थी कि दस हजार आदमियों को पीटकर रख देते। चार तो ठंडे हो गए थे, मगर एक ने हाथ नहीं उठाया। इनके जो महात्मा हैं, वह बड़े भारी फकीर है! उनका हुक्म है कि चपपे से मार खा लो, लड़ाई मत करो।

यू बातें करते-करते दोनों ताड़ीखाने के द्वार तक पहुंच गए। भाई साहब, आपके मजहब में ताड़ी हराम है। मैकू ने बात का जवाब चाटे से दिया। ऐसा तमाचा मारा कि स्वयं सेवक की आंखों में खून आ गया। ऐसा मालूम होता था, गिरा चाहता था है। दूसरे सोए सेवक ने दौड़कर उसे संभाला। पांचों उंगलियों का रक्त में प्रतिबिंब झलक रहा था।

मगर वॉलिंटियर्स तमाचा खाकर भी अपने स्थान पर रहा। मेकू ने कहा - अब हटता है कि और लेगा?

स्वयंसेवक ने नम्रता से कहा - अगर आप की यही इच्छा है, तो फिर सामने किए हुए हूं। जितना चाहिए, मार डालिए। मगर अंदर ना जाइए।
यह कहता हुआ वह मैकू के सामने बैठ गया।
मैकू ने स्वयंसेवक के चेहरे पर निगाह डाली। उस की पांचों उंगलियों के निशान झलक रहे थे। मेको ने इसके पहले अपनी लाठी से टूटे हुए कितने ही सिर देखे थे! पर आज किसी ग्लानि उसे कभी ना हुई थी। वह पांचों उंगलियों के निशान किसी पंचशूल की भांति उसके हृदय में चुभ रहे थे।

कादिर चौकीदारों के पास खड़ा सिगरेट पीने लगा। वहीं खड़े-खड़े बोला - अबे, खड़ा क्या है, लगा कस के एक हाथ।

मैकू ने स्वयंसेवक से कहा - तुम उठ जाओ, मुझे अंदर जाने दो। 
'आप मेरी छाती पर पांव रखकर चले जा सकते हैं।'
'मैं कहता हूं उठ जाओ, मैं अंदर ताड़ी ना पिऊंगा, एक दूसरा ही काम है।'
उसने यह बात कुछ इस दृढ़ता से कहीं की स्वयंसेवक उठकर रास्ते से हट गया। मैकूने मुस्कराकर उसकी और ताका, स्वयंसेवक ने फिर हाथ जोड़कर कहा - अपना वादा भूल न जाना।
एक चौकीदार बोला - लात के आगे भूत भागता है, एक ही तमाशे में ठीक हो गया! 
कादिर ने कहा - यह तमाशा बच्चा को जन्म-भर याद रहेगा। मैकू के तमाचे सह लेना मामूली काम नहीं है।
चौकीदार - आज ऐसा ठोको इन सबों को कि फिर इधर आने का नाम ना ले।
कादिर - खुदा ने चाहा, तो फिर इधर  आएंगे भी नहीं। मगर है सब बड़े हिम्मती। जान को हथेली पर लिए फिरते हैं।

मैकू भीतर पहुंचा, तो ठीकेदार ने स्वागत किया - आओ मैकू मियां! एक ही तमाशा लगाकर क्यों रह गए? एक तमाचे का भला इन पर क्या असर होगा? बड़े लतखोर है सब। कितना ही पीटो, असर ही नहीं होता। बस आज सबों के हाथ-पांव तोड़ दो; फिर इधर ना आएं!
मैकू - तो क्या और न आएंगे?
 ठीकेदार - फिर आते सबो की नानी मरेगी।   
मैकू - और जो कहीं इन तमाशा देखनेवालों ने मेरे ऊपर डंडे चलाए तो!
ठीकेदार - तो पुलिस उनको मार भगाएंगी। एक झड़प में मैदान साफ हो जाएगा। लो, जब तक एकाध बोतल पी लो। मैं तो आज मुफ्त की पिला रहा हूं।
मैकू - क्या इन ग्राहकों को भी मुफ्त?
ठीकेदार - क्या करता, कोई आता ही न था। सुना कि मुफ्त मिलेगी, तो सब 
धंस पड़े।
मैंकू - मैं तो आज न पिऊंगा।
ठीकदार - क्यों? तुम्हारे लिए तो आज ताड़ी मंगवायी है।
मैकू - यो ही, आज पीने की इच्छा नहीं है। लाओ कोई लकड़ी निकालो हाथ से मारते नहीं बनता।
ठीकेदार ने लपक कर एक मोटा सोंटा मेकू के हाथ में दे दिया और डंडेबाजी का तमाशा देखने के लिए द्वार पर खड़ा हो गया।
मेकू ने एक झण डंडे को तोला, तब उछलकर ठीकेदार को ऐसा डंडा रसीद किया कि वही दोहरा होकर द्वार में गिर पड़ा। इसके बाद मेरे मैंकू ने पियक्कड़ों की ओर रुख किया और लगा डंडों की वर्षा करने। न आगे देखता था, न पीछे, बस डंडे चलाए जाते था।

ताड़ीबाजो के नशे हिरण हुए। घबड़ा-घबड़ा कर भागने लगे, कीबाड़ो के बीच में ठीकेदार की देह बिंधी पड़ी थी। उधर से फिर भीतर की ओर लपके। मेकू ने फिर डंडे से आवाहन किया। आखिर सब ठीकदार की देह को रौंद-रौंदकर भागे। किसी का हाथ टूटा, किसी का सिर फूटा, किसी की कमर टूटी। ऐसी भगदड़ मची कि एक मिनट के अंदर ताड़ीखाने में एक चिड़िये का पूत भी न रह गया।
एकाएक मटको के टूटने की आवाज आई। स्वयंसेवक के भीतर झांककर देखा, तो मैंकू मटको को विध्वंस करने में जुटा हुआ था। बोला - भाई साहब, अजी भाई साहब, यह आप क्या गजब कर रहे हैं! इससे तो कहीं अच्छा कि आपने हमारे ही ऊपर अपना गुस्सा उतारा होता। 

मैंकू ने दो-तीन हाथ चलाकर बाकी बची हुई बोतलों और मटको का सफाया कर दिया और तब चलते-चलते ठीकेदार को एक लात जमा कर बाहर निकल आया।

कादिर ने उसको रोककर पूछा - तू पागल तो नहीं हो गया बे? क्या करने आया था और क्या कर रहा है?

मैकू ने लाल-लाल आंखों से उसकी और देखा कहां - हां, अल्लाह का शुक्र है कि मैं जो करने आया था, का वह न करके कुछ और ही कर बैठा। तुममें कूबत हो, तो वालंट्रो को मारो, मुझमें कूबत नहीं है। मैंने तो जो एक थप्पड़ लगाया, उसका रंच अभी तक है और हमेशा रहेगा! तमाचे के निशान मेरे कलेजे पर बन गए हैं। जो लोग दूसरों को गुनाह से बचाने के लिए अपनी जान देने को खड़े हैं, और उन पर वही हाथ उठाएंगे, जो पाजी हैं, कमीना है, नामर्द है। मैकू फीसादी है, लठैत, गुंडा है, पर कमीना और नामर्द नहीं है। कह दो पुलिस वालों से, चाहे तो मुझे गिरफ्तार कर ले।

कई ताड़ीबाज खड़े सिर सहलाते हुए उसकी और सहमी हुई आंखों से ताक रहे थे। कुछ बोलने की हिम्मत ना पड़ती थी। मेकू ने उनकी ओर देखकर कहा - मैं फिर कल आऊंगा। अगर तुममें से किसी को यहां देखा तो खून ही पी जाऊंगा! जेल और फांसी से नहीं डरता। तुम्हारी भलाई इसी में है कि अब भूल कर भी इधर ना आना। यह कांग्रेसवाले तुम्हारे दुश्मन नहीं है। तुम्हारे और तुम्हारे-बाल बच्चों की भलाई के लिए ही तुम्हें पीने से रोकते हैं। इन पैसों से अपने बाल-बच्चों की परवरिश करो, घी-दूध खाओ। घर में तो फाके हो रहे हैं, घरवाली तुम्हारे नाम को रो रही है, और तुम यहां बैठे पी रहे हो? लानत है इस नशेबाजी पर।

मैकू ने वही डंडा फेंक दिया और कदम बढ़ाता हुआ घर चला। इस वक्त तक हजारों आदमियों का हुजूम हो गया था। सभी श्रद्धा, प्रेम और गर्व की आंखों से मैंकू को देख रहे थे।





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